एक परिवार एक टिकट के प्रस्ताव से आर्थिक नीतियों पर सवाल तक, 10 पॉइंट्स में चिंतन शिविर

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लोकसभा और विधानसभा चुनावों में लगातार मिल रही हार और संगठनात्मक कामकाज पर उठ रहे सवालों के बीच उदयपुर में कांग्रेस का चिंतन शिविर शुक्रवार को शुरू हुआ। संगठनात्मक स्तर पर कई बदलावों की उम्मीद की जा रही है। इसके कुछ प्रस्ताव अब तक सामने आए हैं। आइए, 10 पॉइंट्स में जानते हैं कि चिंतन शिविर में अब तक क्या-क्या हुआ?
1.चिंतन शिविर के शुरू होने से पहले कांग्रेस नेता अजय माकन ने प्रस्तावों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एक परिवार को एक टिकट दिया जाएगा। नेता के किसी रिश्तेदार को टिकट तभी मिलेगा, जब वह पांच साल पार्टी के लिए काम कर लेगा। बूथ और ब्लॉक स्तर के बीच में मंडल बनाए जाएंगे। इस समय बूथ के बाद सीधे ब्लॉक स्तर का ढांचा काम करता है। हालांकि, कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि यह फिलहाल प्रस्ताव ही है। अंतिम फैसला चिंतन बैठक में चर्चा के दौरान होगा। 
2.अजय माकन ने यह भी कहा कि बूथ से लेकर कार्यसमिति तक 50 प्रतिशत पद युवाओं को दिए जाएंगे। युवाओं के लिए 50 साल की समयसीमा तय की गई है। वहीं, कोई भी नेता किसी पद पर सिर्फ पांच साल के लिए रहेगा। तीन साल का कूलिंग ऑफ पीरियड रहेगा, जिसके बाद वह फिर से पद की जिम्मेदारी संभाल सकता है। 

3.चिंतन शिविर का आगाज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के उद्घाटन भाषण से हुआ। इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार और आरएसएस को घेरा। उन्होंने कहा कि देश में लोग डर और असुरक्षा के साये में जी रहे हैं। लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचा है। मोदी सरकार राजनीतिक विरोधियों को धमकाने के लिए जांच संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही
4.सोनिया गांधी ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि अब तक पार्टी ने बहुत कुछ दिया है, अब उसे लौटाने का वक्त आ गया है। संगठन स्तर पर कई बदलाव होने हैं। असाधारण चुनौतियों का सामना करने के लिए असाधारण कदम उठाने पड़ते हैं। कांग्रेस नेता भी इसके लिए तैयार रहे, तभी हम दोबारा उस स्थिति में पहुंच सकेंगे जिसकी उम्मीद जनता कर रही है। 
5.अजय माकन ने यह साफ कर दिया था कि किसी भी सदस्य को चिंतन शिविर में मोबाइल के इस्तेमाल की जरूरत नहीं है। नौ पैनल बने हैं, जो अलग-अलग प्रस्तावों पर चर्चा कर रहे हैं। इन चर्चाओं के बाद चिंतन शिविर में अंतिम फैसले होंगे

6.चिंतन शिविर में उन राज्यों पर भी फोकस है, जहां इस साल या अगले साल चुनाव होने हैं। इनमें से दो राज्यों- राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकारें हैं। इसके बाद भी इन राज्यों के विधायकों और बड़े नेताओं को शिविर से दूर रखा गया है।  
7.इस चिंतन शिविर के जरिए पार्टी यह बताने की कोशिश कर रही है कि युवाओं को अधिक से अधिक मौके दिए जाएंगे। जाहिर है कि मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे युवाओं के पार्टी छोड़ने और राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच रहने वाली गहमागहमी को लेकर यह कदम उठाए जा रहे हैं। गहलोत ने भी वीडियो संदेश जारी कर यह जताने की कोशिश की कि युवाओं को मौके दिए जा रहे हैं। प्रवक्ता रागिनी नायक के नेतृत्व में पार्टी ने युवा नेताओं को प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे किया, जिन्होंने मोदी सरकार की युवाओं से जुड़ी नीतियों पर सवाल उठाए। 

8.पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमला बोला। शिविर के दूसरे दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार किसान विरोधी है। इसी वजह से गेहूं का उत्पादन बढ़ने के बावजूद निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियां पूरी तरह से नाकाम रही है। इसी वजह से महंगाई बढ़ रही है। 

9.कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी शनिवार को होने वाले सभी ग्रुप डिस्कशन में शामिल रहेंगे। इस दौरान वे अलग-अलग समूहों में आए प्रस्तावों को जानेंगे और उन पर अपनी राय देंगे।
10.कांग्रेस के चिंतन शिविर में अब तक सिर्फ प्रस्ताव और मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना ही सामने आई है। अब तक पार्टी संगठन में होने वाले बदलावों को सामने नहीं रखा गया है। बताया जाता है कि चिंतन शिविर के तीसरे और निर्णायक दिन अंतिम फैसले होंगे। 

Report- Akanksha Dixit.

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Author: uv24news

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