श्रीकृष्ण जन्मस्थान-ईदगाह प्रकरण अदालत में उपासना स्थल अधिनियम पर 26 अप्रैल को होगी सुनवाई

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शाही ईदगाह मस्जिद के पदाधिकारियों ने अपना पक्ष रखते हुए उपासना स्थल अधिनियम पर बहस करने की मांग की। इस पर अदालत ने सुनवाई के लिए 26 अप्रैल की तिथि नियत की है।
मथुरा में एक बार फिर से अदालत में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास, शाही ईदगाह मस्जिद एवं सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों ने अपना-अपना पक्ष रखा। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने मंगलवार को अदालत में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के दावे को यह कहकर खारिज करने की मांग की कि मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है, जबकि शाही ईदगाह मस्जिद के पदाधिकारियों ने उपासना स्थल अधिनियम पर बहस करने की मांग की। उपासना स्थल अधिनियम पर अब 26 अप्रैल को सुनवाई होगी।
ठाकुर केशवदेवजी महाराज बनाम इंतजामिया कमेटी वाद में सुनवाई के दौरान सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता जीपी निगम ने अदालत ने सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया। बताया कि वादी ने दिए गए विभिन्न प्रार्थनापत्रों की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराई हैं। विभिन्न प्रार्थना पत्र तात्कालिक नहीं हैं। 
शाही ईदगाह के सचिव अधिवक्ता तनवीर अहमद ने उपासना स्थल अधिनियम पर बहस की मांग की। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उन्हें बहुत कम समय के नोटिस पर अदालत में अपनी बहस करने का मौका दिया गया। इन तथ्यों के बाद अदालत ने अब इस मामले में सुनवाई के लिए 26 अप्रैल की तिथि नियत की है। इस दिन उपासना स्थल अधिनियम पर पक्ष रखा जाएगा।
उपासना स्थल अधिनियम 18 सितंबर 1991 में संसद में पास किया गया था। इसमें कहा गया है कि 15 अगस्त 1947 तक अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। यह अधिनियम राम जन्मभूमि, बाबरी मस्जिद और उक्त स्थान या पूजा स्थल से संबंधित किसी भी वाद अपील पर लागू नहीं होगा।

Report- Akanksha Dixit.

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Author: uv24news

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