मध्य प्रदेश: खरगोन बवाल में शामिल आरोपियों के घर जमींदोज होने पर भड़के ओवैसी, कहा- आज उनकी सरकार है कल नहीं होगी

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खरगोन जिले में रामनवमी पर हुए बवाल और आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलने की कार्रवाई पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधा।
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में रामनवमी के जुलूस के दौरान उपद्रव में शामिल आरोपियों के घरों को जमींदोज कर दिया गया है। वहीं, इस मामले के लेकर अब राजनीतिक टिप्पणियों की शुरुआत हो गई हैं। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने घटना की निंदा करते हुए आरोपियों पर हुई कार्रवाई को लेकर सीएम शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधा।

ओवैसी ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान को भूलना नहीं चाहिए वे एक संवैधानिक पद पर बैठे हैं। प्रदेश की जनता के जान माल की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है। सत्ता के नशे में चूर होकर वे गरीबों के आशियाने उजाड़ रहे हैं। मध्य प्रदेश में कानून पर भीड़तंत्र हावी है। शिवराज सिंह की मस्जिदों को नापाक करने और बुजुर्गों पर हमले करने की विचारधारा सही नहीं है। वे न भूलें कि आज उनकी सरकार है कल नहीं रहेगी। 
वहीं, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ओवैसी के बयान पर कहा कि पत्थरबाजी का विरोध किसी ने नहीं किया, लेकिन आरोपियों पर कार्रवाई होने के बाद उनका पक्ष लेने के लिए बयान दिए जा रहे हैं।


घटना को लेकर कांग्रेस नेताओं के भी बयान सामने आ रहे हैं। प्रदेश के पूर्व सीएम और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने आरोपियों के घर जमींदोज करने को लेकर सीएम से सवाल किए हैं। सोशल मीडिया में पोस्ट कर वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने लिखा कि क्या खरगोन प्रशासन ने लाठी-तलवार जैसे हथियारों को लेकर जुलूस निकालने की इजाजत दी थी? क्या जिन्होंने पत्थर फेंके, चाहे जिस धर्म के हों, सभी के घर पर बुलडोजर चलेगा? शिवराज जी मत भूलिए आपने निष्पक्ष होकर सरकार चलाने की शपथ ली है। भारतीय संविधान में हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। धर्म देख कर शिवराज जी कार्रवाई करना असंवैधानिक है। मैं मूल रूप से बिना नोटिस बिना किसी को सुनें कार्रवाई के खिलाफ हूं। क्या भारत के किसी कानून या नियम में इस बुलडोजर संस्कृति का प्रावधान है? यदि आपको गैरकानूनी तरीके से बुलडोजर चलाना ही है, तो उसमें धर्म के आधार पर पक्षपात तो न करें।
खरगोन में रविवार को हुए बवाल को देखते हुए प्रशासन ने रविवार रात से ही तीन दिनों के लिए जिले में कर्फ्यू लगा दिया है। जिला प्रशासन ने शहरवासियों से मेडिकल इमरजेंसी के अलावा किसी भी काम के लिए घरों से बाहर न निकलने की अपील की है। वहीं जिले में होने वाली स्कूल और महाविद्यालय की परीक्षाओं को भी स्थगित कर दिया गया है। प्रशासन की सतर्कता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि घटना के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी मंगलवार को दूध जैसी सेवाओं के लिए भी ढील नहीं दी गई है। उपद्रव में शामिल आरोपियों के करीब 45 अवैध निर्माणों को जमींदोज कर दिया गया है। पुलिस ने विवाद में शामिल 8 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। जिले में सोमवार को कर्फ्यू के चलते दिनभर शांति रही, लेकिन रात को करीब 11 बजे कंदा नदी के दूसरी तरफ बसे रहीमपुरा इलाके में पथराव की घटना हुई। 
रविवार के बवाल के बाद जिले में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई हैं। शहर में कर्फ्यू के लिए अन्य जिलों से पुलिस फोर्स को बुलाया गया है। फिलहाल खरगोन में आरटीपीसी के 77, 13वीं वाहिनी इंदौर-ग्वालियर से 92, 1वीं वाहिनी प्रशिक्षित से 54 व इंदौर से 31 और आरपीटीसी प्रशिक्षण के 152, एसटीएफ के 65 जवानों समेत कुल 850 पुलिस के जवान खरगोन जिले में मोर्चा संभाल रहे हैं। अन्य जिलों से 500 से अधिक जवान पहुंचने वाले हैं। 

Report- Akanksha Dixit.

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Author: uv24news

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