सपा की नजर दलित वोट बैंक पर: संविधान में किया गया बदलाव, बाबा साहब वाहिनी को फ्रंटल संगठन का दर्जा

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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दलित वोट बैंक को अपने पक्ष में लाने के लिए कई बदलाव किए हैं। इसके लिए रणनीति बनाई गई है। सपा की बाबा साहब वाहिनी दलितों के बीच निरंतर वैचारिकी कार्यक्रम चलाएगी। समाजवादी पार्टी दलित वोटबैंक को अपने पक्ष में करने के लिए निरंतर कदम बढ़ा रही है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के संविधान में बदलाव किया गया है। अब फ्रंटल संगठन के रूप में बाबा साहब वाहिनी को भी मान्यता दी गई है। वाहिनी को जिम्मेदारी दी गई है कि वह दलितों के मुद्दे पर निरंतर धरना-प्रदर्शन के साथ वैचारिकी अभियान चलाएगी। सपा में अभी तक फ्रंटल संगठन के रूप में युवजन सभा, लोहिया वाहिनी, यूथ ब्रिगेड, छात्र सभा, महिला सभा, पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ, अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ, जनजाति प्रकोष्ठ, अल्पसंख्यक सभा, मजदूर सभा, व्यापार सभा, अधिवक्ता सभा, सैनिक प्रकोष्ठ हैं। 17 से 19 मार्च के बीच कोलकाता में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में 15 अप्रैल 2021 को बनाई गई बाबा साहब वाहिनी को फ्रंटल संगठन बनाने का प्रस्ताव रखा गया। इसे सर्वसम्मत से मंजूरी दी गई। तय भी तय किया गया कि अनुसूचित जाति और जनजाति प्रकोष्ठ पहले की तरह कार्य करते रहेंगे।

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Author: Akanksha Dixit

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