आजम खां पर लटक रही उम्रकैद की भी तलवार, बेटे की उम्र का फर्जी शपथपत्र पड़ सकता है महंगा

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यूपी की सियासत में हेट स्पीच के जरिये चर्चा में रहने वाले आजम खां को भले ही अभी तीन साल की सजा हुई है लेकिन उन पर अभी आजीवन कारावास की सजा की तलवार भी लटक रही है। फर्जी शपथपत्र महंगा पड़ सकता है। यूपी की सियासत में हेट स्पीच के जरिये चर्चा में रहने वाले आजम खां को भले ही अभी तीन साल की सजा हुई है लेकिन उन पर अभी आजीवन कारावास की सजा की तलवार भी लटक रही है। बेटे को विधायक बनाने की जद्दोजहद में उसकी उम्र बढ़ाने के फेर में फर्जी शपथपत्र का इस्तेमाल किया जाना आजम और उनके परिवार को महंगा पड़ सकता है। प्रमाणपत्र के लिए कूटरचना और उसकी साजिश करने के आरोप में नामजद आजम खां और उनकी पत्नी ऐसे आरोपों में फंसे हैं, जिनमें आजीवन कारवास या फिर 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
दरअसल, अब्दुल्ला आज़म जो आज़म खां के बेटे हैं, उन्होंने स्वार विधानसभा से चुना लड़ा। वह वर्ष 2017 में 25 वर्ष के नहीं थे। भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने इस मामले में थाना गंज रामपुर में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
इसमें आकाश सक्सेना ने आरोप लगाए कि आज़म खां और उनकी पत्नी तंजीम फातिमा द्वारा बेटे अब्दुल्ला आज़म के दो फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाए गए। पहला बर्थ सर्टिफिकेट रामपुर नगर निगम से बना था, जिसमें अब्दुल्ला की जन्म तिथि एक जनवरी 1993 दिखाई गई थी। इस जन्मतिथि के मुताबिक, वह वर्ष 2017 में विधानसभा का चुनाव लड़ने के लायक नहीं थे, उनकी उम्र महज़ 24 साल थी। नियमत उन्हें चुनाव लड़ने के लिए उम्र 25 वर्ष होनी चाहिए। फर्जी जन्मतिथि के मामले में चल रहा है आपराधिक मुकदमा आरोप हैं कि अब्दुल्ला वर्ष 2017 का चुनाव लड़ सकें लिहाजा, आज़म खां ने अपने पद और रसूख का फायदा उठाते हुए लखनऊ नगर निगम से वर्ष 2015 में सपा सरकार के दौरान एक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार करवाया। इसमें आजम खां और तंजीम फातिमा की ओर से शपथपत्र देने की बात सामने आई है। शपथपत्र में कहा गया कि अब्दुल्ला आज़म लखनऊ में पैदा हुए थे और उनकी जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 है। नतीजतन, उनकी उम्र 25 वर्ष हो गई और वह चुनाव लड़ने के योग्य हो गए। इस मामले में अब्दुल्ला के चुनाव जीतने के 45 दिन के भीतर हाईकोर्ट में आपत्ति की गई और 16 नवंबर 2020 को हाईकोर्ट ने उन्हें अयोग्य करार दिया और उन्हें पांच साल तक ली गई धनराशि लौटाने के आदेश दिए। इसी मामले में अब्दुल्ला की विधायकी भी चली गई थी। आपराधिक मामले में फैसला न होने के चलते उनके चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगी क्योंकि उन्हें सजा नहीं हुई थी। अब इस मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में आपराधिक मामले में सुनवाई हो रही है। यह अपराध आईपीसी की धारा-420/467/468/471/120 बी के तहत मुकदमे की सुनवाई हो रही है। आईपीएस की धारा–467 में लाभ लेने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने का अपराध बनता है। इस अपराध में अधिकतम आजीवन कारावास या फिर 10 वर्ष की सजा का प्रावधान है। एमपी-एमएलए कोर्ट में अगर आरोप सिद्ध हो गए तो अभियुक्तों को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
यह भी संभव है कि उन्हें 10 साल की सजा हो। इस मामले में अब सिर्फ तीन गवाहियां होनी बाकी हैं। अगर जल्द फैसला आया तो आजम खां, अब्दुल्ला आजम और उनके परिवार की मुसीबत और बढ़ सकती हैं। इस मामले में आजम खां हाईकोर्ट गए थे कि इस एफआईआर को खारिज कर दिया जाए लेकिन हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी।

Report- Akanksha Dixit.

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Author: Akanksha Dixit

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