दिवाली के अगले दिन दिल्ली का AQI 323 पर, केजरीवाल ट्वीट कर बोले- प्रदूषण कम हुआ

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘ प्रदूषण के क्षेत्र में दिल्लीवासी काफ़ी मेहनत कर रहे हैं। काफ़ी उत्साहजनक नतीजे आये हैं। पर अभी लंबा रास्ता तय करना है।’ पटाखों पर प्रतिबंध के बावजूद दिवाली की रात राष्ट्रीय राजधानी के कई इलाकों में पटाखे छोड़े गये। मंगलवार को यहां वायु प्रदूषण बेहद खराब स्तर पर दर्ज किया गया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के आज जारी डेटा के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध के बावजूद देर रात तक हुई आतिशबाजी के कारण मंगलवार सुबह प्रदूषण का स्तर बेहद खराब रहा और एक्यूआई बढ़कर 323 पहुंच गया। इस बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा है कि दिल्ली में प्रदूषण कम हुआ है और इसे और कम करने का प्रयास आगे भी जारी रहेगा। सीएम ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘ प्रदूषण के क्षेत्र में दिल्लीवासी काफ़ी मेहनत कर रहे हैं। काफ़ी उत्साहजनक नतीजे आये हैं। पर अभी लंबा रास्ता तय करना है। दिल्ली को दुनिया का सबसे बेहतरीन शहर बनायेंगे।’ समिति के अनुसार, दल्लिी के जहांगीरपुरी में सामान्य से 10 गुणा अधिक वायु प्रदूषित दर्ज की गई है। रात एक्यूआई 770 दर्ज किया गया था। यह आईआईटी दिल्ली में 334, पूसा में 304, मथुरा रोड में 323, गुरूग्राम में 245, आर के पुरम 208, पंजाबी बाग में 202, दिल्ली वश्विवद्यिालय में 365, ओखला में 262, गाजियाबाद में 278, दिल्ली एयरपोर्ट में 354 आनंद विहार में 374 एक्यूआई दर्ज किया। मंगलवार सुबह अपेक्षाकृत बेहतर वायु गुणवत्ता का मतलब यह नहीं है कि यह अच्छी हवा है। राष्ट्रीय राजधानी के 35 निगरानी केंद्रों में से 30 में सुबह सात बजे पीएम 2.5 का स्तर राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से पांच से छह गुना अधिक रहा।पीएम 2.5 महीन कण होते हैं जो 2.5 माइक्रोन या उससे कम व्यास के होते हैं और श्वसन नली के माध्यम से शरीर में गहराई तक जा सकते हैं तथा फेफड़ों तक पहुंच कर रक्तप्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं।
आतिशबाजी पर प्रतिबंध के बावजूद दिल्ली के कई हिस्सों में लोगों ने पटाखे चलाए, लेकिन पिछले दो वर्षों की तुलना में इसकी तीव्रता कम दिखाई दी। दिल्ली सरकार ने सितंबर में एक जनवरी 2023 तक सभी प्रकार के पटाखों के उत्पादन, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी, जिसमें दिवाली भी शामिल है, जिसका पालन वह पिछले दो वर्षों से कर रही है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के चेयर प्रोफेसर गुफरान बेग ने कहा कि पंजाब और हरियाणा में सोमवार को खेतों में पराली जलाई गई, लेकिन हवा की गति के कारण धुंआ छंट गया। इसलिए, दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान (लगभग 10 प्रतिशत) भी ”बहुत अधिक” नहीं रहा।हर साल दिवाली पर दिल्ली के पीएम 2.5 प्रदूषकों में पटाखों और पराली जलाने का योगदान रहा है। लेकिन इस साल यह पूर्व के वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत कम रहा है। मोटे तौर पर स्थिर वायु गुणवत्ता की स्थिति के पीछे एक अन्य महत्वपूर्ण कारक मध्यम हवा की गति और गर्म स्थितियां थीं जिससे प्रदूषक तेजी से संचय नहीं कर सके और वायु गुणवत्ता को ‘गंभीर’ श्रेणी में जाने से रोका जा सका।
दिवाली 2021 में चार नवंबर को और 2020 में 14 नवंबर को मनाई गई जब तापमान काफी कम था और हवाएं शांत थीं। भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) की प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के अनुसार, दिन (मंगलवार) के दौरान हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहने का अनुमान है और अगले दो दिनों में इसमें थोड़ा सुधार होने की संभावना है।

Report- Akanksha Dixit.

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Author: Akanksha Dixit

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