काशी में अविमुक्तेश्वरानंद को मिली थी सरस्वती की उपाधि, आठ साल की उम्र में ही बन गए थे सन्यासी

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ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ के नए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वेरानंद आखिरी बार अपने परिवार से साल 2003 में काशी में मुलाकात की थी। उन्हें सरस्वती की उपाधि भी यहीं मिली। उनका जन्म प्रतापगढ़ में हुआ था।
ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ के नए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज अपने परिवार वालों से आखिरी बार 15 अप्रैल वर्ष 2003 को काशी में मिले थे। उनके दंड सन्यास दीक्षा की जानकारी मिलने पर परिवार के लोग काशी पहुंचे थे। इसी दीक्षा के बाद उन्हें सरस्वती की उपाधि मिली थी। काशी में ही पूरे परिवार ने उनसे मिलकर आशीर्वाद लिया था। द्वारिकापीठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती रविवार को ब्रह्मलीन हो गए। सोमवार को उनके सबसे करीबी बताए जा रहे अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ज्योतिष्पीठ बद्रीनाथ का नया शंकराचार्य घोषित किया गया। प्रतापगढ़ जिले की पट्टी तहसील के ब्राह्मणपुर गांव के मूल निवासी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती आठ साल की उम्र में ही परिवार से विरत होकर पूजा-पाठ में लीन हो गए थे।
इसके बाद से वह कभी परिवार वालों से मिलने घर नहीं आए। 15 अप्रैल साल 2003 को उनके दंड सन्यास दीक्षा के लिए काशी चुना गया। यह जानकारी जब उनके बड़े भाई गिरजाशंकर पांडेय को हुई तो उन्होंने परिवार में इसकी चर्चा की। इसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद की झलक पाने के लिए पूरा परिवार काशी जाने को तैयार हो गया। बड़े भाई गिरजाशंकर पांडेय अपनी पत्नी और बच्चों के साथ अविमुक्तेश्वरानंद की दंड सन्यास दीक्षा में शामिल होने काशी पहुंच गए। वहीं आखिरी बार वह पूरे परिवार से मिले थे। दंड सन्यास दीक्षा में ही उन्हें सरस्वती की उपाधि मिली थी। इसके बाद से परिवार वालों को उनसे मिलने का सौभाग्य नहीं मिला। सोमवार को जब उन्हें देश के सबसे बड़े पीठ का पीठाधीश्वर बनाए जाने की सूचना परिवार वालों को मिली तो घर वालों को खासी खुशी हुई लेकिन इस बात का दुख भी हुआ कि जगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद जी महाराज ब्रह्मलीन हो गए। ऐसे में परिवार वालों ने शंकराचार्य स्वरूपानंद जी के चित्र पर फूल अर्पित कर नमन किया।
ज्योतिषपीठ बद्रीनाथ के नए पीठाधीश्वर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज की दंड सन्यास दीक्षा में उनके बड़े भाई गिरजाशंकर पांडेय सपत्नीक के अलावा भतीजे शिवराम, श्रीराम, जयराम, सालिग्राम, सीताराम, रामकृष्ण, बलराम व परशुराम पांडेय सपत्नीक व बच्चों के साथ शामिल हुए। गुजरात के जिस गुरुकुल में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने आठ वर्ष की उम्र में शिक्षा लेने के लिए दाखिला लिया था। इससे पहले उसी गुरुकुल में उनके बड़े भाई गिरजाशंकर पांडेय व दो बहनों (सारदाम्बा व पूर्णाम्बा) ने भी शिक्षा लिया था। बड़े भाई शिक्षा पूरी करने के बाद 22 वर्ष की उम्र में घर लौट आए थे जबकि दोनों बहनों ने भी सन्यास धारण कर लिया और काशी में रहने लगी थीं। एक बहन ब्रह्मलीन हो गई हैं जबकि दूसरी बहन अभी भी काशी में सन्याशी के रूप में विद्यमान हैं।
ज्योतिष्पीठ बद्रीनाथ के नए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के भतीजे शिवराम पांडेय ने गुजरात के गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त करने के बाद वहीं मां अनारा देवी के नाम पर गुरुकुल की स्थापना की। वर्तमान में वह गुजरात में अनारा धाम के नाम से गुरुकुल संचालित कर रहे हैं।

Report- Akanksha Dixit.

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Author: Akanksha Dixit

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