असम में आतंक को पनाह देने वाले मदरसों पर चल रहे हिमंत सरमा के बुलडोजर, विपक्ष ने उठाए सवाल

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मदरसों को आतंकवादी संगठनों से कथित संबंधों के लिए गिरफ्तारी के तुरंत बाद ध्वस्त कर दिया गया था। हालांकि, राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने इसके लिए कुछ और कारणों को जिम्मेदार बताया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बात का खुलासा किया कि पूर्वोत्तर राज्य इस्लामिक कट्टरवाद का केंद्र बन गया है। सीएम का यह बयान अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) के कथित लिंक को लेकर पांच ‘जिहादी’ मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने के बाद आया है। इसमें कई मदरसे भी शामिल हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसपर बुलडोजर चलाए गए। इन मामलों में अब तक 27 लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।
मोरीगांव जिले के निजी मदरसे को स्थानीय अधिकारियों ने बुलडोजर का उपयोग करके ध्वस्त कर दिया था। इस मदरसे में 43 छात्र पढ़ते थे। इसके संस्थापक मुफ्ती मुस्तफा की गिरफ्तारी के बाद 28 जुलाई को इसे सील कर दिया गया था। मुस्तफा पर एबीटी और एक्यूआईएस से जुड़े होने और उनके गुर्गों को मदरसे में पनाह देने का भी आरोप है। इसी तरह 29 अगस्त को दो भाइयों (अकबर अली और अबुल कलाम आज़ाद) को गिरफ्तार करने के बाद बारपेटा जिले में एक और निजी मदरसे को गिरा दिया गया। इनके भी जिहादी संगठनों से कथित संबंध थे। इन दोनों पर बांग्लादेश के एक एबीटी ऑपरेटिव मोहम्मद सुमन को पनाह देने का आरोप लगाया गया था। सुमन मदरसे में एक अरबी शिक्षक के रूप में काम कर रहा था। वह आतंकी संगठन का स्लीपर सेल शुरू करने की फिराक में था।
इसके ठीक दो दिन बाद 31 अगस्त को बोंगाईगांव जिले में एक और निजी मदरसे को ध्वस्त कर दिया गया। यहां से मदरसे के एक शिक्षक हाफिजुर रहमान की गिरफ्तारी हुई, जिसके कथित तौर पर एक्यूआईएस और एबीटी से संबंध थे। जिहादी लिंक के आरोप में इस महीने गिराया जाने वाला यह तीसरा निजी मदरसा था।
तीनों निजी मदरसों को आतंकवादी संगठनों से कथित संबंधों के लिए गिरफ्तारी के तुरंत बाद ध्वस्त कर दिया गया था। हालांकि, राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने इसके लिए कुछ और कारणों को जिम्मेदार बताया है। सीएम सरमा ने 4 अगस्त को विध्वंस के बाद कहा, “मदरसे को आपदा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधान के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत ध्वस्त कर दिया गया था। इसका निर्माण स्थानीय अधिकारियों की अनुमति के बिना किया गया था। इसमें अवैध बिजली कनेक्शन था और यह असुरक्षित था।”
29 अगस्त को बारपेटा में दूसरे निजी मदरसे को तोड़े जाने के बाद जिला पुलिस अधीक्षक अमिताभ सिन्हा ने बताया कि सरकारी जमीन पर आवश्यक अनुमति के बिना अवैध रूप से बनाए जाने के कारण इसे ध्वस्त कर दिया गया था।
बोंगाईगांव जिले में डिप्टी कमिश्नर द्वारा जारी एक आदेश के बाद मदरसे तो तोड़ दिया गया था। दलील दी गई कि यह संरचनात्मक रूप से कमजोर और असुरक्षित है। मदरसे के लगभग 200 छात्र जो हॉस्टल में रहकर पढ़ रहे थे, उन्हें उनके घरों में वापस भेज दिया गया या आसपास के स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया था। लोकसभा सांसद और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल ने असम में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा निजी मदरसे पर बुलडोजर का उपयोग करने को अवैध करार दिया। उन्होंने इस तरह के विध्वंस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा, “सरकार ने एक महीने में तीन मदरसों को ध्वस्त कर दिया है। हम खामोश रहे हैं। यदि कोई अवैध गतिविधि है, तो व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। हम इस पर सरकार के साथ हैं।’ उन्होंने आगे कहा, “लेकिन निजी मदरसे जनता के दान से बनाए जाते हैं और उन्हें गिराने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल करना सही नहीं है। देश में कानून का शासन है और एक संविधान है। सरकार को इसका पालन करना चाहिए।’
अजमल ने इस कदम को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि भाजपा 2024 के आम चुनावों से पहले मुसलमानों में डर पैदा करने की कोशिश कर रही है। विपक्षी कांग्रेस और रायजर दल के नेताओं ने भी जिहादी गतिविधियों के खिलाफ मदरसों को ध्वस्त करने के पीछे सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है।
सीएम सरमा ने गुरुवार को अजमल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मदरसों को ध्वस्त करने की हमारी कोई योजना नहीं है। हमारा एकमात्र इरादा यह देखना है कि मदरसों का इस्तेमाल कोई जिहादी तत्व न करें। अगर मदरसों का इस्तेमाल जिहादी विचारधारा के विस्तार के लिए नहीं किया जाता है तो फिर विध्वंस क्यों किया जाएगा?” सीएम सरमा ने गुरुवार को अजमल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मदरसों को ध्वस्त करने की हमारी कोई योजना नहीं है। हमारा एकमात्र इरादा यह देखना है कि मदरसों का इस्तेमाल कोई जिहादी तत्व न करें। अगर मदरसों का इस्तेमाल जिहादी विचारधारा के विस्तार के लिए नहीं किया जाता है तो फिर विध्वंस क्यों किया जाएगा?”
उन्होंने पूछा, “अगर हमें किसी मदरसे के बारे में विशेष जानकारी मिलती है, जिसका इस्तेमाल जिहादी गतिविधि या भारत विरोधी गतिविधि को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है, तो हम ऐसे हर मामले में हर संभव कड़ी कार्रवाई करने जा रहे हैं। अगर एआईयूडीएफ या अजमल इस मुद्दे पर अदालत जाना चाहते हैं तो मैं उन्हें रोकने वाला कौन होता हूं?”
पिछले महीने सरमा ने कहा था कि असम में सभी जिहादी गतिविधियों का केंद्र मदरसा लगता है क्योंकि गिरफ्तार किए गए लोग या तो उनमें पढ़ा रहे थे या एबीटी गुर्गों को आश्रय देने के लिए उनका इस्तेमाल कर रहे थे। बाद में उन्होंने घोषणा की कि राज्य के बाहर के इमामों और मदरसा शिक्षकों के लिए जल्द ही पुलिस वेरिफिकेशन और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो जाएगा।

Report- Akanksha Dixit.

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Author: Akanksha Dixit

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