मोदी के गढ़ में केजरीवाल चलाएंगे भाजपा का ही फॉर्मूला? त्रिपुंड-रुद्राक्ष के क्या मायने

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सोमनाथ मंदिर में पूजा के बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल जब मीडिया के सामने आए तो ललाट पर त्रिपुंड और गले में रुद्राक्ष की माला थी। केजरीवाल के इस अवतार के सियासी मायने भी तलाशे जा रहे हैं।
दिल्ली और पंजाब में फतह करने के बाद आम आदमी पार्टी (आप) ने अब गुजरात और हिमाचल में जोर लगा दिया है। दिल्ली से वाया हिमाचल सोमवार शाम गुजरात पहुंचे अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। पूजा के बाद जब वह मीडिया के सामने आए तो ललाट पर त्रिपुंड और गले में रुद्राक्ष की माला थी। केजरीवाल के इस अवतार के सियासी मायने भी तलाशे जा रहे हैं। सवाल उठाया जा रहा है कि क्या राष्ट्रवाद के बाद केजरीवाल अब सॉफ्ट हिंदुत्व का दांव चलने जा रहे हैं? क्या वह पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के गृहराज्य में भाजपा को उसी के फॉर्मूले पर चुनौती दे पाएंगे?
‘सोमनाथ में पूजा से शांति, देश के लिए मांगी तरक्की’
अरविंद केजरीवाल ने सोमनाथ में पूजा अर्चना की। माथे पर त्रिपुंड, गले में रुद्राक्ष की माला पहने और सिर पर टोकरी लिए केजरीवाल भगवान सोमनाथ की दर पर पहुंचे। यहां विधि-विधान से पूजा के बाद मीडिया से बातचीत में केजरीवाल ने कहा कि उन्हें यहां आकर अच्छा लगा और बहुत शांति मिली। उन्होंने कहा कि भगवान से उन्होंने देश और गुजरात की तरक्की और सुख शांति के लिए प्रार्थना की है। उन्होंने कहा, ”देश की तरक्की, गुजरात की तरक्की, पूरे देशवासियों की सुख शांति के लिए, देश की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की है। सब लोगों की तरक्की हो, सब खुश रहें। सबलोग स्वस्थ रहे। हमारा देश दुनिया का नंबर एक देश बने।” अरविंद केजरीवाल पूजा-पाठ के बाद ना सिर्फ त्रिपुंड और रुद्राक्ष के साथ ‘भक्त’ रूप में मीडिया के सामने आए, बल्कि पार्टी ने भी उनकी तस्वीरों को आधिकारिक ट्विटर हैंडल्स पर साझा की हैं। माना जा रहा है कि हिंदुत्व और भाजपा के लिए प्रयोगशाला कहे जाने वाले गुजरात में अरविंद केजरीवाल
भी नया सियासी फॉर्मूला तैयार कर रहे हैं। वह ‘लोहा लोहे को काटता’ है की तर्ज पर भाजपा का मुकाबला करने के लिए हिंदुत्व का दांव चल रहे हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो आने वाले समय में वह सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर कुछ नए कदम उठा सकते हैं। वह अच्छी तरह जानते हैं कि गुजरात में भाजपा ढाई दशक से सत्ता पर काबिज है और इसके लिए भगवा दल ने ‘विकास, राष्ट्रवाद और हिंदुत्व’ का सहारा लिया है। भाजपा की इस मजबूत किलेबंदी में कांग्रेस सेंध लगाने में नाकाम रही है।
दो साल पहले दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल ने खुद को हनुमान भक्त के रूप में पेश किया था। एक टीवी इंटरव्यू के दौरान उन्होंने हनुमान चालीसा का पाढ़ किया था। उन्होंने कहा था कि बीजेपी उन्हें एंटी हिंदू की तौर पर पेश करने की कोशिश कर रही है। दिल्ली में जीत के बाद केजरीवाल ने हनुमान मंदिर जाकर पूजा की थी। अन्ना आंदोलन से उपजी पार्टी ने हाल के दिनों में राष्ट्रवाद के पिच पर भी खुद को प्रमुख खिलाड़ी के रूप में पेश करने की कोशिश की है। तिरंगा यात्रा आयोजित करने और दिल्ली में जगह-जगह झंडे लगवाने के अलावा पार्टी इन दिनों भारत को नंबर एक देश बनाने को अपना सबसे बड़ा टारगेट बता रही है। दिल्ली में हेप्पीनेस उत्सव हो या शॉपिंग फेस्टिवल के पोस्टर, अरविंद केजरीवाल हाथ में तिरंगा लिए दिखते हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो अरविंद केजरीवाल खुद को भाजपा के विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं और इसके लिए वह अपनी पार्टी वह सभी विशेषताएं दिखाना चाहते हैं, जिनके बल पर भाजपा सफलता अर्जित कर रही है।

Report- Akanksha Dixit.

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Author: uv24news

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