नई शिक्षा नीति पीएम मोदी ने शिक्षकों को कराया जिम्मेदारी का एहसास, बोले-केवल डिग्रीधारक न तैयार करें

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 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी को करोड़ों की सौगात देने से पहले राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय शिक्षा समागम का उद्घाटन किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी को करोड़ों की सौगात देने से पहले राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय शिक्षा समागम का उद्घाटन किया। रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित समागम में पीएम मोदी ने शिक्षकों को उनकी जिम्मेदारी का भी अहसास कराया। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षक तय कर लें, कि हम केवल डिग्री धारक न तैयार करें। हमारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी इसी प्रकार से तैयार की गई है कि सभी बच्चों को उनकी रूचि के अनुसार तैयार होने का मंच मिलेगा।
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे उपनिषदों में कहा गया है कि विद्या ही अमरत्व व अमृत तक ले जाती है। काशी को भी मोक्ष की नगरी इसलिए कहते हैं कि हमारे यहां मुक्ति का एक मात्र मार्ग विद्या को ही माना गया है। शिक्षा व शोध का विद्या व बोध का इतना बड़ा मंथन सर्व विद्या के केंद्र काशी में होगा तो इससे निकलने वाला अमृत अवश्य देश को नई दिशा देगा।
शिक्षा समागम का आयोजन काशी में किया गया है। यहां का मैं सांसद भी होने के नाते होस्ट भी हूं। मेरा मानना है कि आपको कोई दिक्कत न होगी। यदि कोई कमी रह गई है तो दोष मेरा रहेगा। एक होस्ट के नाते कोई भी आपके असुविधा हो जाए तो उसकी क्षमा पहले मैं मांग ले रहा हूं।
उन्होंने शिक्षाविदों को संबोधित करते हुए कहा कि अभी मैं किचेन का उद्घाटन कर रहा हूं। वहां दस-12 वर्ष के बच्चों के साथ गप्प गोष्ठी का मौका मिला। उनसे सुन कर आया हूं, आपको सुनाने आया हूं। चाहूंगा कि अगली बार जब आऊं तो उन बच्चों के टीचर्स से मिलूं। आप कल्पना कर सकते हैं कि मेरे मन में ऐसा क्यो आया। कारण यह कि उन बच्चों में जो कांफिडेंस, प्रतिभा थी वह एक सरकारी स्कूल के बच्चे थे। आपका बच्चा भी ऐसा ही टैलेंट प्रस्तुत करेंगे, तो आप भी उन्हें घर आए किसी मेहमान के सामने खड़ा कर देंगे। कहने का आशय यह कि आप ऐसे इंस्ट्टीयूट बनाएं कि जब ऐसे बच्चे आएं तो उन्हें कोई कमी न महसूस हो।
उन्होंने कहा कि यहां जो तीन दिन में चर्चा हो प्रभावी हो। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मुख्य आधार शिक्षा को संकुचित दायरे से बाहर निकालना है। नई सदी के अनुसार अपडेट करना है। हमारे यहां मेधा की कमी कभी नहीं रही, लेकिन ऐसी व्यवस्था बनाई गई थी जिसका मतलब केवल नौकरी थी।
पीएम मोदी ने कहा कि अंग्रेजों ने गुलामी के दौर में उसका निर्माण अपने लिए सेवक बनाने के लिए किया था। आजादी के बाद बदलाव हुआ लेकिन उतना कारगर न था। अंग्रेजों की बनाई व्यवस्था कभी भारत से मेल नहीं खा सकती। हमारे यहां कला की अलग-अलग धारणा थी।
उन्होंने कहा कि बनारस ज्ञान का केंद्र इसलिए था कि यहां ज्ञान विविधता से ओतप्रोत था। इसे शिक्षा व्यवस्था का आधार होना चाहिए। हम डिग्री धारी ही न तैयार करें, न कि जितने मानव संसाधन की जरूरत हो उपलब्ध कराए। यह संकल्प शिक्षकों व शिक्षण संस्थानों को करना है। हमारे शिक्षक जितनी तेजी से इस भावना को आत्मसात करेंगे उनता ही युवा पीढ़ी को लाभ होगा। नए भारत के निर्माण के लिए आधुनिक व्यवस्था का समावेश उतना ही जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना की इतनी बड़ी महामारी से हम उबरे और दुनिया की सबसे तेजी से उभर रही अर्थव्यवस्था में एक हैं। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं। जहां पहले सिर्फ सरकार ही सब करती थी आज निजी क्षेत्र भी साथ मिल कर चल रहा है। अभी तक स्कूल कालेज व किताबें यह तय करते थे कि बच्चों को किस दिशा में जाना है लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति से थोपने वाला युग चला गया है।
उन्होंने कहा कि इस बात का ध्यान रखना होगा कि हमें वैसा ही शिक्षक व शिक्षा संस्थान की व्यवस्थाएं, मिजाज सर्च करना ही होगा। नई शिक्षा नीति में बच्चों की प्रतिभा निखार व कुशल बनाने पर है। कांफिडेंट बनाने पर है। शिक्षा नीति इसके लिए जमीन तैयार कर रही है। तेजी से आ रहे परिवर्तन के बीच आपकी भूमिका अहम है। हमें पता होना चाहिए कि दुनिया कहां जा रही है। हमारा देश कहां है, हमारे युवा कहां है। हम उन्हें कैसे तैयार कर रहे हैं। यह हमारा बड़ा दायित्व है। यह समस्त शिक्षा संस्थानों को सोचने की आवश्यकता है कि क्या हम फ्यूचर रेडी हैं। हमें सौ साल के बाद की सोच कर चलना होगा। वर्तमान को संभालना है, लेकिन भविष्य के लिए व्यवस्था खड़ी करनी होगी।
पीएम मोदी ने कहा कि आज पोते-पोती जब पूछते होंगे तब आप कहते होंगे क्या सिर खा रहा है, लेकिन वास्तव में आपका दिमाग उसका जवाब नहीं दे पा रहा है। आप घर में भी अपने बच्चों को मिस मैच फील कर रहे हैं। नई सोच के साथ आइए। योग्य बनिए, नहीं तो गैप हो जाए। अतः भविष्य को जानें समझें, खुद को विकसित करें।
अभी डिजिटल इंडिया के कार्यक्रम में 10वीं-12वीं के बच्चों से रिसर्च की सोच देख दंग रह गया। जब उनकी क्लास में माडल पढ़ाए जा रहे थे। जीन मैपिंग तक की बात कर रहे थे। जब ये हायर क्लास में पहुंचेंगे तो क्या संस्थान उनसे मैच कर पाएंगे। हमें अभी से यह सोचना होगा कि जिस उम्र में बच्चों के मन में अन्वेषण है, उन्हें वैसी व्यवस्था मिले।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति को दो साल पूरे होने हैं। विविधता भरा देश और राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वागत प्रशंसनीय है। आम तौर पर सरकार का दबाव होता है डाक्यूमेंट बन जाए। फिर सौंप कर खाली हो जाते हैं फिर दूसरा उसकी जगह ले लेता है। हमने हर पल इस नीति को जिंदा रखा है। इतने कम समय में कम से कम 25 सेमिनार में गया और इस पर लगातार संवाद कर रहा हूं।
विजन समझा रहा हूं। पूरी सरकार के सभी विभाग कोशिश कर रहे हैं। आप अपनी यूनिवर्सिटी में भी निरंतर मंथन करें। साथियों को प्रेरित करें तब जाकर इसका लाभ होगा। इसके क्रियावन्यवन की चुनौतियों पर सोचना होगा। कोई काम हाथ में लेंगे तो समस्या समाधान की राह भी निकलती है।
उन्होंने कहा कि आप सभी का प्रयास ही है कि आज का युवा बड़े बदलाव में भागीदार बन रहा है। बड़ी संख्या में नए कालेज, आईआईटी, आईआईएम बन रहे हैं। मेडिकल कालेज स्थापना में 55 फीसद की वृद्धि हुई है। देश के इन प्रयासों का परिणाम है कि वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में बढ़ोतरी हो रही है। अभी इस दिशा में लंबी दूरी तय करनी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति मातृ भाषा में पढ़ाई के रास्ते खोल रही है।
कहा कि काशी की इस धरती से हुई शुरूआत संकल्पों को नई ऊर्जा देगी। विश्वास है भारत वैश्विक शिक्षा का बड़ा केंद्र बन सकता है। दुनिया के देशों में भी हमारे युवाओं के लिए नए अवसर बन सकते हैं। हमें इंटरनेशनल स्टैंडर्ड पर शिक्षा को तैयार करने के प्रयास करने होंगे। इसके लिए निर्देश दिए गए हैं। भारतीय शिक्षा व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से जोड़ने में भी मदद करेगी। देश के युवाओं की सोच से देश के विश्वविद्यालयों को भी जुड़ना चाहिए।
यूनिवर्सिटी सरकारी सिस्टम में भी भागीदारी करे तो चीजें बदल सकती हैं। लैब टू लैंड का रोड मैप होना चाहिए। लैंड के अनुभव को लैब में भी लाना चाहिए। परंपरागत अनुभव का भी लेना चाहिए। हमारे पास परिणाम के साथ प्रमाण व भी होने चाहिए। डेटा बेस होना चाहिए। एविडेंस बेस ट्रेडिशनल मेडिसन पर काम किया जाना चाहिए। ऐसा करके दुनिया के कई देश आगे बढ़ रहे हैं। डेमोग्राफिक एविडेंस पर काम करना होगा।
दुनिया के समृद्ध देश भी परेशान हैं कि वहां की एजिंग बढ़ रही है। युवा पीढ़ी कम हो रही है। हमारे यहां भी जल्द ऐसा समय आने वाला है। इसका साल्यूशन तलाशना होगा। दूसरे देश कैसे कर रहे हैं। यह सोचने का काम हमारे यूनिवर्सिटीज की सहज स्वभाव होना चाहिए।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पूरी दुनिया में सोलर एनर्जी पर चर्चा हो रही है। हम भाग्यशाली हैं कि हमारे पास चमकता सूरज है। विज्ञान, अनुसंधान से हमें सोलर एनर्जी पर अधिक से अधिक उपयोग कर काम करना चाहिए। क्लाइमेट चेंज पर काम करना होगा।
आज देश खेल के क्षेत्र में भी उपलब्धियां हासिल कर रहा है। खेल विवि बन रहे तो अन्य इससे विरत न रहें। मैदान शाम को भरे रहने चाहिए। वातावरण बनना चाहिए। विवि लक्ष्य बना सकते हैं कि आने वाले वर्षों में हम कितने गोल्ड ला सकते हैं। दुनिया के कितने देश में हमारे बच्चे खेलने जाएंगे। इससे यह हमारी बड़ी अमानत बन सकते हैं। अनगिनत संभावनाएं हैं।
नई नीति का आधार संकुचित सोच से बाहर निकलना
राष्ट्रीय शिक्षा नीति अवसर प्रसार कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मूल आधार, शिक्षा को संकुचित सोच के दायरों से बाहर निकालना और उसे 21वीं सदी के आधुनिक विचारों से जोड़ना है। जब संवाद होता है, तब समाधान निकलता है। संवाद से ही संभावनाओं का विस्तार होता है। इसलिए भारतीय लोकतंत्र में ज्ञान के प्रवाह के साथ ही सूचना का प्रवाह भी अविरल बहा और निरंतर बह रहा है। प्रधानमंत्री ने शिक्षाविदों के बीच जा उनसे भेंट मुलाकात भी की।

Report- Akanksha Dixit.

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Author: uv24news

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